गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

शुभकामनाएं...

वेलेंटाइन्स डे
हर साल की तरह इस बार भी आज
भावनाएं फिर से उफान मार रही हैं
तुम्हें प्यार करने का बड़ा मन हो रहा है
हा.. यार दिल कर रहा है...
ले लूं तुम्हारा हाथ अपने हाथों में
और चल पड़ू तुम्हारे साथ
मोहब्बत की राह पर
होकर दुनिया से बेखबर
तुम्हे इतना प्यार करूं
इतना चाहूं कि सारी कायनात
हो जाए नतमस्तक
और हो जाए हमारी मुरीद
देखो ना...
नहीं है कोई दीवार हमारे बीच
न ही है कोई बंधन
और आज वेलेंटाइन्स डे भी है।
लेकिन मैं तुमसे मिल नहीं सकता
नहीं कर सकता तुमसे प्रेम-संवाद
क्योंकि तुम तो हो ही नहीं
कहीं भी नहीं...
धरती के किसी कोने में भी नहीं
होगी भी कैसे
तुम तो अमूर्त हो
काया से परे
लोग कहते हैं
तुम तो पैदा ही नहीं हुई
सचमुच मेरी कल्पना
अगर तुम सचमुच की हुई होती
स्त्री की काया में
तो तुम्हें करता जी भरकर प्यार
तब ये दर्द इस हद तक न बढ़ता...
जीवन का फसाना इतना त्रासद ना होता
तभी को इस खूबसूरत और मुबारक दिन भी मैं
हूं भीड़ से घिरा लेकिन बिलकुल अकेला हूं
ये जीवन घाटे का सौदा ना होता
बस एक कतरा गर मोहब्बत का होता...
इसलिए
जिनके पास हो तुम प्रेयसी के रूप में
वो हैं बड़े भाग्यशाली
उन्हें वेलेंटाइन्स डे की शुभकामनाएं...